फुर्र-फुर्र लोक कथा – Furar Furar Hindi Folk Tale

फुर्फ फुर्फ लोक कथा हिंदी में – बहुत समय पहले की बात है एक सूत काटने वाला जुलाहा कही से आ रहा था और थक जाने की वजह से नदी किनारे आराम करने के लिए ठहर गया. अचानक हवा चली और और उसकी सारी रुई उड़कर हवा मे चली गई | ये देखकर जुलाहा सोचने लगने यदि घर गया मेरी पत्नी आज मुझे जरूर डाँटेगी | ये सोचकर उसने फुर्फ फुर्फ बोलने का निश्चय किया और रस्ते भर फुर्फ फुर्फ बोलता जा रहा था | रस्ते में एक शिकारी मिला, जो चिडियो का शिकार करता था | फुर्फ फुर्फ की आवाज को सुनकर सारे पंछी उड़ गये | ये देखकर शिकारी को बहुत गुस्सा आय परन्तु उसको डांटकर ही छोड़ दिया और बोला – “पकड़ो-पकड़ो” बोलते हुये जाओ | Furar Furar Folk Tale…

 

कुछ दूर जाने के बाद में रस्ते में चोर मिले और “पकड़ो-पकड़ो” की आवाज को सुनकर दर गये परन्तु जब देखा तो सिर्फ एक आदमी दिखा | चोरों ने मिलकर जुलाहा को पकड़ा और कहने लगे आज तो तुम हमें पकड़वा ही देते | और कहने लगे अब से तुम “इसकों रखो, ढेरों लाओ”, ऐसा कहना | 

 

फुर्र-फुर्र लोक कथा – Furar Furar Lok Kathayen…

 

“इसकों रखो, ढेरों लाओ” कहते हुये आगे की तरफ बढ़ गया | आगे एक गांव मिला, जहा पर सारे गांव में बीमारी फैली हुई थी | बात को सुनकर  गुस्सा आया की यहाँ सब दुखी है और ये  “इसकों रखो, ढेरों लाओ”, कहते हुये जा रहा है | गांव वालो ने कहा की तुम यह कहो की ‘यह तो बड़े दुख की बात है, ऐसा कहो | 

 

‘यह तो बड़े दुख की बात है, कहते हुये जा रह था, रस्ते में किसी यहाँ शादी महोत्सव हो रहा था | जुलाहा की बात को सुनकर वहाँ पर सभी लोग जुलाहा को मारने के आग बबूला होने लगे | किसी तरह से सभी को समझाया और वहाँ से बच गया और घर की तरफ चल पड़ा और कहने लगा “चल पड़ा” | ऐसा कहते हुये घर की तरफ चलने लगा | 

 

थोड़ी देर बाद चलने पर रात्रि हो गई और उसे अपनी धर्मपत्नी की बात याद आई की उसने कहा की यदि रस्ते में देरी हो जाये तो वही पर पर ठहर जाना | वही पर सो गया | सुबह हुई तो उसकी धर्मपत्नी ने उसके शरीर पर एक बाल्टी पानी पेखकर जगाया और अपनी पत्नी को देखकर मुँह से बोल पड़ा – भाग्य में हो तो ऐसा सुख मिले।

 

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