शेखचिल्ली का नाम कैसे पड़ा: शेखचिल्ली कहानी – Kaise Naam Pada Shekh Chilli

शेखचिल्ली का नाम कैसे पड़ा: शेखचिल्ली कहानी –आखिर शेखचिल्ली का नाम कैसे पड़ा ? शेखचिल्ली का जन्म एक शेख परिवार में हुआ था और वे लोग बहुत ही गरीब थे | इनके पिताजी की  बचपन में ही परलोक सिधार गये थे, और इनका पालन – पोषण इनकी माताजी ने किया | और इनकी माँ का मानना था बीटा बड़ा होकर हमारी गरीबी को दूर करेगा और तब जाकर चैन की सास ले पायेंगे | Kaise Naam Pada Shekh Chilli…

 

शेखचिल्ली जी की माताजी ने मदरसे में दाखिला करा दिया और मदरसे के सरे बच्चे शेखचिल्ली को ‘शेख’ कह कर पुकारते थे | वह के मौलवी साहब ने खूब मेहनत करके सभी बच्चो को पढ़ाते थे | उन्होंने पढ़ाया यदि कोई पुरुष है तो “जा रहा है” और यदि स्त्री है तो “जा रही है” | जैसे रहीम पढ़ रहा है और रजिया पढ़ रही है | 

 

एक बार की बात है कोई लड़की पानी भरने कुए में गई थी और गिर गई थी और वह मदद के पुकार रही थी | शेख ने आवाज सुनी और अपने दोस्तों के पास चला गया मदद लेने के लिए और उनके पास जाकर कहने लगा की वह मदद के लिए ‘चिल्ली’ रही है | उसकी बात किसी को समझ में नहीं आ रही थी की आखिर में शेख कहना क्या चाहता है ? फिर लाख समझाने के बाद किसी को उसकी बात समझ नहीं आई तो शेख अपने मित्रों को साथ में लेकर कुएं के पास ले गया और सब ने मिलकर लड़की की मदद की और कुएं से बहार निकाला | बाहर निकलने के बाद भी वह रो रही थी | शेख फिर से बार – बार यहिओ कह रहा था – देखो कैसे चिल्ली रही है | 

 

फिर उनके दोस्तों में से किसी ने पूछा की शेख तू बार बार चिल्ली-चिल्ली क्यों बोल रहा है ?

 

तब जाकर शेख ने जवाब दिया की लड़की है तो ‘चिल्ली’ और लड़का होता तो ‘चिल्ला’ मत |  

 

 उनके दोस्तों ने शेख की मूर्खता को जान गये और तब से उन्हें ‘चिल्ली-चिल्ली’ कहकर चिढ़ाने लगे।

 

और उनका नाम ही ‘शेखचिल्ली’ हो गया |  

 

असली बात न तो शेखचिल्ली को समझ आया और न ही अपने नाम को लेकर कभी बुरा माना | 

 

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